Wednesday, 21 June 2017

ग़ज़ल बनाना पड़ेगा

212 212 212 2

नाम तुझको बनाना पड़ेगा ।
काम करके दिखाना पड़ेगा ।।

भव्यता भाव मे गर निहित हो ।
भव्य करके बताना पड़ेगा ।।

मुश्किलों की दवा है पसीना ।
खूब इसको बहाना पड़ेगा ।।

आसमां भी समझता इरादे ।
कोशिशों से झुकाना पड़ेगा ।।

कर सके जो न खुल के इबादत ।
उनका' सिर भी उठाना पड़ेगा ।।

प्यास बादल को' लगने लगी है ।
तुझको दरिया बढ़ाना पड़ेगा ।।

काम चुप होके' चलता कहाँ है ।
बोल के ही हँसाना पड़ेगा ।।

कहकशों की कहानी नही है ।
चाँद तारे सजाना पड़ेगा ।।

है *तरुण* जिस्म में गर रवानी ।
जिंदगी को लुभाना पड़ेगा ।।

*कविराज तरुण सक्षम*
*साहित्य संगम संस्थान*

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